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The poem of changing human

poet

a struggle human poem

रफ़्तार धीमी है,पर चल रहा हूं
बाहर उजाला इसलिए है
क्योंकि,अंदर से “में जल रहा हूं

संघर्षी,गतिमान मनुष्य का जीवन The Life of a struggling man

writer

संघर्षपूर्ण जीवन

कुछ लोगों को में इसलिए खलता हूं
क्योंकि मैं उनके साथ नहीं,,विरोध में चलता हूं
और मैं गर्दिशों का वो चिराग हूं
जो अंधेरों में ही नहीं
तूफान में भी शान से,,जलता हूं