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the first turtle rehabilitation centre is to begin in Bhagalpur (Bihar India) , बिहार राज्य के भागलपुर में कछुओं के सरक्षण के लिए पहला कछुवा पूर्णनिवास केंद्र लगभग तैयार हो गया है ,

the first turtle rehabilitation centre is to begin in Bhagalpur (Bihar India) , बिहार राज्य के भागलपुर में कछुओं के सरक्षण के लिए पहला कछुवा पूर्णनिवास केंद्र लगभग तैयार हो गया है ,

केन्द्रीय पूर्णनिवास कछुवा केंद्र

बिहार राज्य के भागलपुर जिले में पहला कछुआ पूर्णनिवास केंद्र तैयार हो रहा है देश में बिहार राज्य के भागलपुर जिले के वन विभाग क्षेत्र में कछुओं सरंक्षण व इन छोटे के रहने के लिए पहला पूर्णनिवास केंद्र बनाया जा रहा है ,भागलपुर वन्य क्षेत्र में गंगा के उदग़म क्षेत्रों में साफ पानी के प्रभाव व बालू के टीले के कारण यहां का कछुओं के लिए सबसे उपयुक्त प्रजनन स्थल माना गया है,

यह पूर्णनिवास केंद्र के माध्यम से छोटे छोटे जीवों का सरक्षण में रखा जाएगा तथा उनके विकास आदि का उद्गम स्थल बनाया जाएगा , घायल व बीमार कछुओ की सुरक्षा दी जाएगी ,

बिहार में पाए जाने वाले कछुए का आकार बहुत बड़ा माना जाता है इन कछुओं का भार 15 किलोग्राम के आसपास बहुत आसानी से पहुंच जाता है क्योंकि वहां का वातावरण इन्हीं के अनुकूल पाया जाता है यह कछुए नदी में पाए जाने वाले मृत जीव, कार्बनिक पदार्थों, खतरनाक मछलियों तथा जलीय पादप जीव की मात्रा को नियंत्रित करते हैं इन्हें संतुलन जलीय परिस्थिति के संकेत को के रूप में भी एक महत्वपूर्ण जीव माना जाता है यह पानी के अंदर पारिस्थितिकी संतुलन बनाते हैं,

कछुआ पालन करने के दो मुख्य कारण है, सबसे पहले यह भोजन के रूप में एक पौष्टिक आहार के रूप में प्रयोग किया जाता है दूसरा इसका व्यापार कछुए का मांस

मनुष्य की इम्यूनिटी बहुत अधिक मजबूत करता है इसके खाने से मनुष्य के शरीर में अधिक ऊर्जा मिलती है जिससे खतरनाक रोगों से आसानी से लड़ा जा सकता है इसका मास शरीर को सुडौल का स्वस्थ रखता है,

कछु में कई प्रकार की प्रजाति पाई जाती हैं कछुओं में 25 प्रकार की प्रजाति भारत में पाई जाती हैं,जबकि गंगा नदी में ही भारत में 14 प्रकार की प्रजाति पाई जाती हैं ,

जिसमें से दो मुख्य प्रजाति निम्न है,

1 हार्ड सेल वाले कछुए

, 2 – चित्तीदार कछुए पाए जाते हैं यह दो प्रकार की प्रजाति को एशिया चीन व जापान में अत्यधिक मात्रा में डिमांड रहती है अतः कछुआ पालन रोजगार के लिए भी एक अच्छा व्यापार है ,

राज्यों से गैरकानूनी रूप से पकड़े जाने वाले कछुओं को भी यहां कोर्ट के माध्यम से पहुंचाए जा सकते हैं,पहले जब तस्करों से पुलिस से कछुवे जब्त करती थी , तो उन्हे रखने ,पालने के लिए कोई प्रबंध नहीं था अब तक ऐसा कोई प्रबंध नहीं था कुछ व्यापारी गैरकानूनी तरीके से भी इसका व्यापार करते थे,

कछुए से जुड़ी मुख्य जानकारियां निम्न,

1- कछुआ एक बहुत ही प्राचीन जीव है जिसके शरीर पर एक विशेष प्रकार की परत होती है जो इसकी हर प्रकार की कठिन समय में मदद करती है कछुए के मुंह में कोई दांत नहीं पाया जाता है

2- कछुए की कुछ प्रजाति जमीन पर रहती है तो तो कुछ पानी के अंदर ज्यादातर कछुए आवाज नहीं करते हैं ,

3- मादा प्रजाति कछुए गर्भावस्था के बाद एक 1 से 25 अंडे को जन्म देती हैं ,अंडों से बच्चे दो से 3 महीने के बाद बाहर निकलते हैं,

4-कुछ विशेष प्रकार की प्रजाति के कछुए 150 साल तक जिंदा रह सकते हैं,

5- कुछ कछुए मांसाहारी पर कुछ कछुए साकारी प्रजाति के पाए जाते हैं जो पेड़ पौधों के पत्ते फल फूल साकारी भोजन होता है तथा कुछ कछुए जो मांसाहारी होते हैं वह छोटे-छोटे कीड़े मकोड़े मछलियां आदि खाते हैं,


The first turtle full habitat center is being prepared in Bhagalpur district of Bihar state, the first turtle rehabilitation center is being built in the forest department area of Bhagalpur district of Bihar state to conserve turtles and live in these small, Ganga in Bhagalpur forest area. For the effect of clear water and sand dunes in the upland areas, it is considered the most suitable breeding ground for turtles here,

Through this Poor Nivas Kendra, small creatures will be kept in the safe and their origin will be made a place of development, protection of injured and sick tortoises will be given,

The size of the turtles found in Bihar is considered to be very large, the weight of these turtles reaches around 15 kg very easily because the environment there is found to be favorable. These turtles are found in the dead creatures, organic materials, found in the river, Dangerous fishes and aquatic plants control the amount of organisms. They are also considered an important organism as a sign of equilibrium aquatic conditions. They create ecological balance under water,

There are two main reasons for rearing turtles, firstly it is used as a nutritious food as food and secondly its trade is turtle meat.

Man’s immunity is very strong, its food provides more energy in human body, which can be easily fought against dangerous diseases, its mass keeps the body healthy and healthy,

Many types of species are found in turtles, we find 25 species of turtles in India, while they find 14 types of species in India only in the river Ganges,

The two main species are the following,

1 hard cell turtle

, 2 – Spotted turtles are found, this two species are in high demand in Asia, China and Japan, so turtle farming is also a good trade for employment,

The illegally caught turtles from the states can also be transported through the courts, earlier when the smugglers used to confiscate the tortoises from the police, there was no such arrangement to keep and raise them. Some traders also traded it illegally,

Following are the main information related to the turtle:

1- Tortoise is a very ancient organism which has a special type of layer on its body which helps it in all kinds of difficult times, no teeth are found in the mouth of a turtle.

2- If some species of turtle lives on the ground, then some turtles do not make any sound inside the water,

3- Female species of turtles give birth to 1 to 25 eggs after pregnancy, the eggs hatch after two to 3 months,

4 – Turtles of some special species can live up to 150 years,

5- Some turtles are found on carnivores, some turtles are of the genus Sakari, which are the fruit of the trees, the flowers are the fruitful food, and some turtles which are carnivorous eat small insects, fishes, etc.


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