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What exactly is Vipassana Meditation in Boudhiest dhamm ?


विपश्यना (Vipassana) आत्मनिरीक्षण द्वारा आत्मशुद्धि की अत्यंत पुरातनसाधना-विधि है। जो जैसा है, उसे ठीक वैसा ही देखना-समझना विपश्यना है। लगभग २६ ०० वर्ष पूर्व भगवान गौतम बुद्ध ने विलुप्त हुई इस पद्धति का पुन: अनुसंधान कर इसे सार्वजनीन रोग के सार्वजनीन इलाज, जीवन जीने की कला, के रूप में सर्वसुलभ बनाया। इस सार्वजनीन साधना-विधि का उद्देश्य विकारों का संपूर्ण निर्मूलन एवं परम मुक्ति की अवस्था को प्राप्त करना है। इस साधना का उद्देश्य केवल शारीरिक रोगों के कष्टों को ही दूर करना ही नहीं अपितु संसार के सभी मनुष्य के सभी दुखों को खोजकर दूर करना हैं |
विपश्यना आत्म-निरीक्षण द्वारा आत्मशुद्धि की साधना है। अपने ही शरीर और चित्तधारा पर पल-पल होनेवाली परिवर्तनशील घटनाओं को तटस्थभाव से निरीक्षण करते हुए चित्तविशोधन का अभ्यास हमें सुखशांति का जीवन जीने में मदद करता है। हम अपने भीतर शांति और सामंजस्य का अनुभव कर सकते हैं।
हमारे विचार, विकार, भावनाएं, संवेदनाएं जिन वैज्ञानिक नियमों के अनुसार चलते हैं, वे स्पष्ट होते हैं। अपने प्रत्यक्ष अनुभव से हम जानते हैं कि कैसे विकार बनते हैं, कैसे बंधन बंधते हैं और कैसे इनसे छुटकारा पाया जा सकता है। हम सजग, सचेत, संयमित एवं शांतिपूर्ण बनते हैं।
Vipassana is the most archaic method of self-purification through introspection. To see what is as it is, to understand it is Vipassana. About 2500 years ago, Lord Gautama Buddha researched this extinct method again and made it universal as universal cure for universal disease, the art of living. The aim of this universal practice is to achieve complete elimination of disorders and a state of exclusion. The purpose of this spiritual practice is not only to overcome physical diseases, but also to remove all the sufferings of human beings.
Vipassana is the practice of self-purification through self-observation. The practice of Chittha Vidhyasana helps us to live a life of happiness while neutrally observing the momentary events of our own body and Chitthara. We can experience peace and harmony within us.
The scientific rules that our thoughts, disorders, feelings, sensations follow, are clear. From our direct experience we know how disorders are formed, how bonds are formed and how to get rid of them. We become alert, alert, restrained and peaceful.


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